कलियुग की लेखनी
July 26, 2017
0

लिखना फ़ैशन से बाहर जा रहा है आजकल। यू-ट्यूब से टक्कर ले सकें, इतनी ताकत नहीं बची आज की कलमों (की-बोर्ड्स) में। अब जो मनोरंजन आपको दो आयामों (दृष्टि और ध्वनि)से मिलेगा, उसकी तुलना एक आयाम वाले मनोरंजन के स्त्रोत से करने पर कौन जीतता है, यह बात छुपी नहीं है। आप यू-ट्यूब पर देखते भी हैं, और सुनते भी हैं। ऐसे में कहीं ज़्यादा समय खपा कर, दिमाग को रचनात्मक बनाने की मेहनत करने की कोशिश करके पढना? ऐसा काफ़ी कम लोग करते हैं।

बात उपन्यासों या सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े लेखों की नहीं है। इन्हें तो हर कोई पढता है। बात है लघु कहानियाँ और कविताओं की। अंग्रेज़ी में बोलें तो इन सबको पढने के लिये आपका ‘इंटरेस्ट’ होना चाहिये। वहीं यू-ट्यूब आपको कहीं ज़्यादा आसानी से बिना ‘इंटरेस्ट’ के इनके बदले विविध प्रकार के मनोरंजन स्त्रोत उपलब्ध कराता है। और वर्तमान लेखकों की लेखनी में वह धार नहीं जो द्विआयामी मनोरंजन से, किसी व्यक्ति को एक आयाम वाले मनोरंजन स्त्रोत में खींच कर संतुष्ट कर दे।

कलियुग की लेखनी कुंद पड़ रही है। अब देखना यह है कि मुट्ठी भर लोंगो की जीजिविषा तकनीकि उन्नयन से किस तरह लोहा ले पाती है।

 

-Gyan Akarsh

Have something to share?
Write to us at theagbrand@gmail.com
Connect with us on Facebook and Instagram.
NEW: Click here to get SRM updates on WhatsApp!

Give it your thought...